राजस्थान में 1857 की क्रांति - ( rajasthan 1857 ki kranti )
राजस्थान में 1857 की क्रांति का सूत्रपात राजनीतिक जन-जागरण में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा गया है। राजस्थान में राजपूताना के अधिकांश राजाओं के पास अपनी संगठन शक्ति और दूरदर्शितापूर्ण नीतियों का अभाव था। इसी कारण से मुगल बादशाहों की अधीनता के बाद धीरे-धीरे वे अंग्रेजों के अधीन भी होते गए।
व्यापार के बहाने ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आयी। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 100 वर्ष तक भारत में विभिन्न तरीकों से शोषणकारी नीतियों के द्वारा शोषण किया। गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली द्वारा सहायक संधि की नीति प्रारंभ की गई अंग्रेजों को अपनी विदेश नीति के तहत उत्तरदायित्व था कि देशी राज्यों की बाह्य सुरक्षा प्रदान करना। लेकिन खर्चा स्वयं राज्यों को उठाना पड़ता था।
इसके बाद लॉर्ड हार्डिंग की आर्थिक पार्थक्य की नीति के तहत राजस्थान के राजाओं ने अंग्रेजों से सन्धियां की। 1848 में लॉर्ड डलहौजी गवर्नर जनरल बनकर भारत आए थे। इन्होंने भारत में एक नए सिद्धांत राज्यों के विलय की नीति लागू की। इस नीति के तहत भारत के अनेक रियासतों को अंग्रेजी राज्यों में मिला लिया गया। गोद निषेध नीति लागू करने वाला गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ही था।
सेना में एनफील्ड राइफलों में गाय और सूअर की चर्बी लगे कारतूसों के प्रयोग से भी भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को बहुत बुरा झटका लगा। ईस्ट इंडिया कंपनी की विभिन्न शोषणकारी नीतियों के कारण भारतीय शासक जमीदार भारतीय सैनिक जनसाधारण लोगों में अंग्रेजों के विरुद्ध असंतोष उत्पन्न हो गया।
यह असंतोष 1857 की क्रांति के रूप में अंग्रेजी शासन को भारत से उखाड़ फेंकने की दिशा में पहला प्रयत्न था। राजस्थान में 1857 के विद्रोह की जानकारी सार रूप में इस प्रकार दी जा रही है।
राजस्थान में 1857 की क्रांति के समय छावनियां -
1857 की क्रांति के समय राजस्थान में 6 सैनिक छावनियां थी। जो इस प्रकार हैं-
याद करने का सूत्र - ए ननी देख ब्याव
एरिनपुरा छावनी
नसीराबाद छावनी
नीमच छावनी
देवली छावनी
खेरवाड़ा छावनी
ब्यावर छावनी
नसीराबाद छावनी -
यह सबसे शक्तिशाली छावनी थी। राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत नसीराबाद से ही हुई थी। अजमेर राजस्थान में ब्रिटिश सत्ता का प्रमुख केंद्र था। अजमेर से बंगाल नेटिव इन्फेंट्री हटाए जाने तथा मेर पलटन को वहां नियुक्त करने के कारण 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों में असंतोष बढ़ गया था। चर्बी वाले कारतूस का ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रयोग करने पर सैनिक असंतोष बढ़ गया था ।
नसीराबाद छावनी ने 18 मई 1857 को शाम 4 बजे विद्रोह किया था। राजपूत सरदार डूंगरसिंह ने नसीराबाद छावनी को लूट लिया था। अंग्रेजी कम्पनी का विरोध करने वाले सैनिक 18 जून 18 57 को दिल्ली पहुंच गए और अंग्रेजी सेना पर आक्रमण करके उसे पराजित कर दिया।
नीमच छावनी-
यह छावनी राजस्थान में न होकर राजस्थान से बाहर मध्यप्रदेश में स्थित थी।यह राजस्थान और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित थी। लेकिन इसकी जिम्मेदारी मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट कैप्टन शावर्स के पास थी। क्रांति का दूसरा केंद्र नीमच बना जहां 3 जून 1857 की क्रांति फूट पड़ी।
2 जून को कर्नल एबोर्ट ने हिंदू और मुसलमान सिपाहियों को गंगा और कुरान की शपथ दिलाई थी कि वह ब्रिटिश शासन के प्रति वफादार रहेंगे। कर्नल एबोर्ट ने स्वयं भी बाइबिल को हाथ में लेकर शपथ ली थी। लेकिन 3 जून 1857 को नसीराबाद की क्रांति का समाचार नीमच पहुंचा तो उसी दिन रात्रि के 11:00 बजे वहां भी विद्रोह हो गया।
क्रांतिकारियों ने छावनी को घेर लिया और उसको आग लगा दी। बंगलों पर तैनात किए गए सैनिकों ने क्रांतिकारी पर गोली चलाने से इंकार कर दिया और कुछ समय बाद ही विभिन्न क्रांतिकारियों के साथ मिल गए। सैनिकों ने हीरासिंह के नेतृत्व में विद्रोह किया था।
डूंगला नामक स्थान पर नीमच छावनी से बचकर भागे हुए 40 अंग्रेज अफसर व उनके परिवार के लोगों को क्रांतिकारियों ने बंधक बना लिया। लेकिन मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट मेजर शावर्स ने मेवाड़ की सेना की सहायता से उन्हें छुड़ाकर उदयपुर पहुंचाया।
महाराणा स्वरूप सिंह ने उन्हें पिछोला झील के जग मंदिर में शरण प्रदान की। 5 जून 1857 को क्रांतिकारियों ने आगरा होते हुए दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। क्रांतिकारियों ने आगरा जेल में बंद सभी कैदियों को मुक्त कर दिया और सरकारी खजाने को लूट लिया।
एरिनपुरा छावनी - ( पाली , जोधपुर )
यह स्थान राजस्थान के वर्तमान जिला सिरोही में स्थित है। 1857 के विद्रोह के समय यह मारवाड़ रियासत का एक भाग था। 21 अगस्त 1857 को छावनी के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया था। क्रांतिकारियों ने शिवनाथ सिंह के नेतृत्व में चलो दिल्ली मारो फिरंगी का नारा लगाते हुए दिल्ली की ओर प्रस्थान किया।
खेरवाड़ा छावनी -
यह छावनी उदयपुर में स्थित थी। छावनी ने 1857 की क्रांति में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया था। यहां भीलों की टुकड़ी ( कोर भील ग्रुप ) थी।
देवली छावनी -
यह छावनी टोंक जिले में स्थित थी। नीमच के क्रांतिकारी देवली भी पहुंचे और उन्होंने छावनी को आग लगा दी। बताया जाता है कि देवली छावनी में कोई भी ब्रिटिश सैनिक हताहत नहीं हुआ क्योंकि छावनी को पहले खाली किया जा चुका था और वहां से ब्रिटिश अधिकारियों को मेवाड़ स्थित जहाजपुर कस्बे में बसा दिया गया था।
क्रांतिकारियों ने कोटा रेजिमेंट के 60 व्यक्तियों को देवली छावनी से अपने साथ चलने के लिए बाध्य किया परंतु रास्ते में यह सैनिक भाग निकलने में सफल हो गए और कुछ दिनों पश्चात वापस देवली आ गए। देवली में जून 1857 में विद्रोह हुआ था ।
ब्यावर छावनी -
ब्यावर छावनी वर्तमान अजमेर जिले में स्थित थी। 1857 की क्रांति में ब्यावर छावनी ने प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया था। ब्यावर में मेर जाति की टुकड़ी थी।
राजस्थान में 1857 की क्रान्ति के समय पॉलिटिकल एजेंट के नाम :-
1. मेवाड़ में पॉलिटिकल एजेन्ट :- मेजर शार्क्स
2. मारवाड़ में पॉलिटिकल एजेन्ट :- मैकमोहन
3. जयपुर में पॉलिटिकल एजेन्ट :- ईडन
4. कोटा में पॉलिटिकल एजेन्ट :- मेजर बर्टन
राजस्थान के प्रमुख अमर शहीदों के नाम :-
1. प्रताप सिंह बारहठ :- (1918)
2. रूपाजी एवं कृपाजी धाकड़ :- (1922)
3. बालमुकन्द बिरला :- (1942)
4. सागरमल गोपा :- (1946)
5. काली बाई भील :- (1947)
विद्रोह स्थल - नेतृत्व करता - समय - दमन करता
दिल्ली - बहादुर शाह जफर - 12 मई 1857 - निकलसन हडसन
कानपुर - नाना साहब - 5 जून 1857 - कॉलिन कैंपबेल
लखनऊ - बेगम हजरत महल - 4 जून 1857 - कॉलिंग कैंपबेल, आउटड्रम
जगदीशपुर - कंवर सिंह - 12 जून 1857 - विलियम ट्रेलर
झांसी - लक्ष्मी बाई ,तांत्या टोपे - 4 जून 1857 - जनरल ह्यूरोज
फैजाबाद - मोहम्मद अहमदुल्ला - जून 1857 - जनरल रेनॉल्ट
बरेली - खान बहादुर खान - जून 1857 - कैंपबेल
इलाहाबाद - लियाकत अली - 6 जून 1857 - जनरल नील
नोट :- बेगम हजरत महल को महक परी और लक्ष्मीबाई को महल परी कहा जाता है
रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु पर जनरल ह्यूरोज ने कहा था कि इन सोई हुई क्रांतिकारियों में यह औरत अकेली मर्द है सेनापति हडसन ने 20 सितंबर 1857 को बहादुर शाह जफर को हिमायू के मकबरे से गिरफ्तार किया तथा उन्हें रंगून भेज दिया गया जहां 1862 में उनकी मृत्यु हुई अंग्रेजों का दिल्ली पर पुनः नियंत्रण 20 सितंबर 1857 को हो गया
1857 की क्रांति का स्वरूप
सैनिक विद्रोह - जॉन सिले और लॉरेंस ने इस विद्रोह को सैनिक विद्रोह कहा
T R होम ने इसे सभ्यता और बर्बरता का संघर्ष कहा
जेम्स आउट ने इसे हिंदू मुस्लिम षड्यंत्र कहा
सावरकर ने इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा
1857 की क्रान्ति के समय तांत्या टोपे की भूमिका:-
तांत्या टोपे 2 बार राजस्थान आयें। 8 अगस्त, 1857 को वह भीलवाड़ा आये, इस समय इन्होने रार्बट्स को हराया और टोपे ने झालावाड़ के शासक पृथ्वीसिंह को भी हराया।
11 दिसम्बर 1857 को दूसरी बार राजस्थान आये। इस समय उन्होने बांसवाड़ा को जीता।
मेजर ईंड़न को सूचना का पता चला तो वह तांत्या टोपे का पीछा करते हुए बांसवाड़ा पहुंचा।
बांसवाड़ा से उदयपुर अन्त में तांत्या टोपे के विष्वासघाती मित्र मानसिंह नरूका ने धोखा किया व ईंड़न को टोपे का पता बता दिया एवं इन्हें फांसी की सजा दी गईं।
1857 की क्रान्ति की असफलता के कारण:-
राजस्थान के राजाओें ने क्रान्तिकारियों का साथ न देकर ब्रिटिष सरकार का साथ दिया।
क्रान्ति नेतृत्वहीन थी।
क्रान्तिकारियों में एकता व सम्पर्क का अभाव था।
1857 की क्रान्ति के प्रभाव:-
राजस्थान की रियासतें पूर्णतः ब्रिटिष सरकार के हाथों में चली गई।
राजस्थान की जनता पर देषी रियासतों और अंग्रेजों की गुलामी का दोहरा अंकुष लगा।
समाज में राष्ट्रीय और राजनैतिक चेतना का उदय हुआ।
यातायात के साधनों का विकास हुआ।
1857 की क्रांति के संबधित प्रश्न उत्तर
Q.1 1857 का विद्रोह कहाँ से प्रारंभ हुआ था ? – मेरठ
Q.2 1857 की क्रांति की शरुवात कब हुई थी ? – 10 मई 1857
Q.3 1857 के विद्रोह में किस नेता का नाम ‘धोन्दु पंत’ था ? – नाना साहब
Q.4 1857 की क्रांति के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री कौन थे ? – लॉर्ड पर्मस्टन
Q.5 मंगल पांडे को कब फासी दी गई थी ? – 8 अप्रैल 1857
Q.6 1857 के विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाले मंगल पांडे किस बटालियन से था ? – 34 वीं नेटिव इन्फ़ेट्री
Q.7 वह आधुनिक इतिहासकार, जिसने 1857 के विद्रोह को “स्वतंत्रता की पहली लड़ाई” कहा था ? – वी. डी. सावरकर
Q.8 दिल्ली में विद्रोह का सैन्य नेतृत्व किसने किया था ? – बख्त खाँ
Q.9 1857 का विद्रोह भारत के किस हिस्से में हुआ था ? – उत्तरी और मध्य भारत में
Q.10 1857 विद्रोह के समय किसने इलाहाबाद को आपातकालीन मुख्यालय बनाया था ? – लॉर्ड कैनिंग
Q.11 1857 में पंजाब में किसने अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया ? – नामधारी सिखों ने
Q.12 भारत के शिक्षित वर्ग 1857 की क्रांति में …………? – तटस्थ रहे
Q.13 1857 के विद्रोह के नेता तात्या टोपे का मूल नाम क्या था ? – रामचन्द्र पांडुरंग
Q.14 रानी लक्ष्मीबाई का मूल नाम क्या था ? – मणिकर्णिका
Q.15 मंगल पांडे की घटना कहाँ हुई थी ? – बेरक पुर
Q.16 1857 के विद्रोह में किसने सबसे पहेले अपना बलिदान दिया था ? – मंगल पांडे
Q.17 1857 की क्रांति में किसे मान सिंह ने धोखा दिया और फिर अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर फांसी से दी ? – तात्या टोपे
Q.18 महारानी विक्टोरिया ने भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश ताज के नियंत्रण में लेने की घोषणा कब की थी ? – 1 नवम्बर 1858
Q.19 1857 के विद्रोह को किसने शरू किया था ? – सिपाहियों ने
1857 Ki Kranti Ke Questions Answers
Q.20 पहला भारतीय सिपाही कौन, था जिसने चर्बी वाले कारतूस का प्रयोग करने से इंकार कर दिया ? – मंगल पांडे
Q.21 रानी लक्ष्मी बाई को अंतिम युद्ध में सामना किससे करना पड़ा था ? – हयुरोज
Q.22 1857 के विद्रोह के सरकारी इतिहासकार कौन थे ? – एस. एन. सेन
Q.23 1857 के विद्रोह की असफलता के बाद बहदूर शाह-२ को कहाँ निर्वासित कर दिया गया ? – रंगून
Q.24 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय फौज के नाव अगठ के लिए कौनसा आयोग बनाया गया ? – पिल आयोग
Q.25 रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल कहाँ है ? – ग्वालीयर
Q.26 इलाहाबाद में 1857 के संग्राम का नेता कौन था ? – मौलवी लियाकत अली
Q.27 1857 के विद्रोह में कुँवर सिंह ने कहा से नेतृत्व किया था ? – बिहार से
Q.28 बेगम हजरत महल ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किस शहर से किया था ? – लखनऊ
Q.29 1857 के विद्रोह के दौरान बहादुर शाह ने किसे शाह-ए-आलम का किताब दिया था ? – बख्त खान
Q.30 1857 की क्रांति का प्रतीक क्या था ? – कमल एवं चपाती
Q.31 1857 का विद्रोह का असफल होने मुख्य कारण ? – केन्द्रीय संगठन की कमी के कारण
Q.32 1857 के विद्रोह को एक “षड्यंत्र” की संज्ञा किसने दी थी ? – जेम्स आउटम व डब्ल्यू डेलर
Q.33 बरेली विस्तार का नेता कौन था ? – खान बहादुर खाँ
Q.34 1857 के संघर्ष में सबसे ज्यादा भाग लेने वाले सिपाहियों की संख्या कहाँ से थी ? – अवध से
राजस्थान में 1857 की क्रांति के G.K. questions in hindi : -
1. राजस्थान में सर्वप्रथम 1857 की क्रांति की शुरुआत कहाँ से और कब हुई ?
उत्तर : - नसीराबाद ( अजमेर ) से 28 मई 1857 को हुई ।
2. राजस्थान में 1857 की क्रांति के समय कितनी सैनिक छावनियाँ थी ?
उत्तर : - 6 सैनिक छावनियाँ थी, नसीराबाद, नीमच, एरिनपुरा, ब्याबर, खैरवाडा और देवली ।
3. राजस्थान में 1857 की क्रांति में कौनसी छावनियों ने भाग नहीं लिया ?
उत्तर : - ब्यावर और खैरवाडा ने ।
4. राजस्थान में 1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण क्या था ?
उत्तर : - सेना में एनफील्ड राइफलों में चरबी लगे कारतूसों का प्रयोग ।
5. भारत में 1857 के विद्रोह की शुरुआत सर्वप्रथम कहाँ से हुयी ?
उत्तर : - मेरठ से 10 मई 1857 को ।
6. नीमच छावनी में 1857 का विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ ?
उत्तर : - हीरासिंह के नेतृत्व में ।
7. राजस्थान में नीमच छावनी में 1857 का विद्रोह कब हुआ ?
उत्तर : - 3 जून, 1857 को ।
8. राजस्थान में एरिनपुरा छावनी में 1857 का विद्रोह कब और किसने किया ?
उत्तर : - 21 अगस्त 1857 को, पूर्बिया सैनिकों ने किया ।
9. राजस्थान में आउवा का विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ ?
उत्तर : - ठाकुर कुशाल सिंह के नेतृत्व में।
10. आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह और कैप्टन हीथकोट की सेना में कहाँ पर युद्ध हुआ ?
उत्तर : - बिथौडा ( पाली ) में, 8 सितम्बर 1857 को ।
11. आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह ने एजीजी पैट्रिक लॉरेंस को किस स्थान पर और कब पराजित किया ?
उत्तर : - चेलावास स्थान पर, 18 सितम्बर 1857 को ।
12. मोकमैसन कहाँ का पॉलिटीकल एजेंट था ?
उत्तर : - जोधपुर का ।
13. कोटा का विद्रोह किनके नेतृत्व में आरम्भ हुआ ?
उत्तर : - जयदयाल और मेहराबखान ।
14. कोटा का पॉलिटीकल एजेंट कौन था ?
उत्तर : - मेजर बर्टन ।
15. मेवाड के किस शासक ने अंग्रेज अफसर व उनके परिवार को अपने यहाँ पर शरण दी ?
उत्तर : - महाराजा स्वरूप सिंह ने, पिछोला झील के जगमन्दिर में ।
16. धौलपुर में किनके नेतृत्व में 1857 का विद्रोह हुआ ?
उत्तर : - राव रामचन्द्र व हीरालाल के नेतृत्व में ।
17. ताँत्या टोपे सर्वप्रथम राजस्थान में कब आये ?
उत्तर : - 8 अगस्त 1857 को, भीलवाडा में आये ।
18. ताँत्या टोपे और जनरल राबर्ट्स की सेना में किस स्थान पर युद्ध हुआ ?
उत्तर : - कुआडा नामक स्थान पर, (कोठारी नदी के तट पर है) ।
19. ताँत्या टोपे कितनी बार राजस्थान आये ?
उत्तर : - दो बार ।
20. अंग्रेजों ने ताँत्या टोपे को किसकी सहायता से पकडा ?
उत्तर : - नरवर के जागीरदार मानसिंह नरूका की सहायता से ।
1857 की क्रांति-प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गये (100) महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
अंग्रेजी भारतीय सेना में चर्बी वाले कारतूसों से चलने वाली एनफील्ड राइफल को शामिल किया गया- दिसंबर 1856 में
भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य तात्कालिक कारण था- अंग्रेजों का धर्म में हस्तक्षेप का संदेश
मंगल पांडे की घटना हुई थी- बैरकपुर में
मंगल पांडे सिपाही था- 34वी बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के
1857 के विद्रोह के दौरान बहादुर शाह ने’ साहब ए आलम बहादुर’ का खीताब दिया था- बख्त खान को
1857 की क्रांति का प्रमुख कारण था- ब्रिटिश साम्राज्य की नीति
1857 की क्रांति सर्वप्रथम प्रारंभ हुई- मेरठ से
1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित पहली घटना थी- सैनिकों का दिल्ली के लाल किले पर पहुंचना
1857 के स्वाधीनता संग्राम का प्रतीक था- कमल और रोटी
1857 के संग्राम के झांसी, मेरठ, दिल्ली तथा कानपुर केंद्रों में से सबसे पहले अंग्रेजों ने पुना अधिकृत किया- दिल्ली को
1857 के स्वाधीनता संघर्ष की वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की जन्म स्थली है- वाराणसी
1857 के बरेली विद्रोह का नेता था- खान बहादुर
महारानी लक्ष्मी बाई की समाधि स्थित है- ग्वालियर में
रानी लक्ष्मीबाई को अंतिम युद्ध में सामना करना पड़ा- ह्यूरोज का
का विद्रोह लखनऊ में जिसके नेतृत्व में आगे बढ़ा, वह थी- बेगम आफ अवध
इलाहाबाद में 1857 के संग्राम का नेता था- मौलवी लियाकत अली
1857 के संघर्ष में भाग लेने वाले सिपाहियों के सर्वाधिक संख्या थी- अवध से
नाना साहब का” कमांडर इन चीफ”था – तात्या टोपे
अजीमुल्ला खा सलाहकार थे- नाना साहब के
वर्ष 1857 के विद्रोह के संदर्भ में नाना साहब, कुंवर सिंह, खान बहादुर खान तथा तात्या टोपी में से वह जिसे, उसके मित्र ने धोखा दिया, तथा जिसे अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाकर मार दिया गया- तात्या टोपे को
1857 के क्रांतिकारियों में वह जिसका वास्तविक नाम’ रामचंद्र पांडुरंग’ था- तात्या टोपे
कुंवर सिंह, 1857 के विद्रोह के एक प्रमुख नायक थे| वह संबंध थे- बिहार से
पटना के 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नेता थे- राजपूत कुंवर सिंह
असम में 1857 की क्रांति का नेता था- दीवान मनीराम दत्त
857 के विद्रोह का बिहार में 15 जुलाई, 1857 से 20 जनवरी, 1858 तक केंद्र था- जगदीशपुर
जगदीशपुर का वह व्यक्ति जिसने 1857ई . के विप्लव में क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया- कुंवर सिंह
जगदीशपुर के राजा थे- कुंवर सिंह
1857 ई. की क्रांति में अंग्रेजों व जोधपुर के संयुक्त सेना को पराजित करने वाला था- आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह
अजमेर, जयपुर, नीमच तथा आउवा में से राजस्थान में 1857 की क्रांति का केंद्र नहीं था- जयपुर
चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, शहादत खान तथा माखनलाल चतुर्वेदी में से 1857 में अंग्रेजों से संघर्ष किया- शहादत खान ने
मौलवी अहमदुल्लाह शाह, मौलवी इंदादुल्लाह , मौलाना फज्लेहक खेराबादी तथा नवाब लियाकत अली में से 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का सबसे कट्टर दुश्मन था- मौलवी अहमदुल्लाह शाह
1857 के विद्रोह को देखने वाले उर्दू कवि थे- मिर्जा ग़ालिब
सुप्रसिद्ध उर्दू शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का मूल निवास था- आगरा
आजादी की पहली लड़ाई 1857 में भाग नहीं लिया- भगत सिंह ने
1857 के विद्रोह में बेगम हजरत महल, कुंवर सिंह, ऊधम सिंह तथा मौलवी अहमदुल्लाह मैं से संबंध नहीं था- ऊधम सिंह
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता करने वाला राजवंश था- ग्वालियर के सिंधिया
भारत में शिक्षित मध्य वर्ग ने – 1857 के विद्रोह से तटस्थता बनाए रखी थी
खेतिहर मजदूर, साहूकार, कृषक तथा जमीदार वर्गों में 1857 के विद्रोह में भाग नहीं लिया – साहूकार तथा जमीदार ने
झांसी, चित्तौड़, जगदीशपुर तथा लखनऊ में से वह क्षेत्र जो 1857 विद्रोह से प्रभावित नहीं था- चित्तौड़
बिहार के दानापुर, पटना, आरा , मुजफ्फरपुर, मुंगेर में से 1857 के विद्रोह से अप्रभावित भाग था- मुंगेर
1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल था- लार्ड कैनिंग
1857 विद्रोह के समय बैरकपुर में ब्रिटिश कमांडिंग ऑफिसर था- जान बेनेट हैरसे
1857 मैं इलाहाबाद को आपातकालीन मुख्यालय बनाया था- लार्ड कैनिंग ने
1857 के विद्रोह के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे- विश्वकांट पामस्टर्न
1857 का विद्रोह मुख्यत: असफल रहा- किसी सामान्य योजना और केंद्रीय संगठन की कमी के कारण
1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम असफल हुआ क्योंकि – भारतीय सिपाहियों में उद्देश्य की एकता की कमी थी, प्राय: भारतीय राजाओं ने ब्रिटिश सरकार का साथ दिया, ब्रिटिश सिपाही कहीं अच्छे सज्जीत कथा संगठित थे
अंग्रेज राजपूत राज्यों में 1857 के विद्रोह को दबाने में सफल रहे क्योंकि- स्थानीय शासकों ने क्रांतिकारियों का साथ नहीं दिया
जनरल जॉन निकलसन, जनरल नील, मेजर जनरल हैवलॉक तथा सर हेनरी लारेंस मैं से वह ब्रिटिश अधिकारी जिन्होंने लखनऊ में अपना जीवन खोया था- जनरल नील, मेजर जनरल हैवलॉक तथा सर हेनरी लारेंस
1857 के विद्रोह को एक’ षड्यंत्र’ की संज्ञा दी- सर जेम्स आउट्रम एव डब्ल्यू . टेलर ने
वह आधुनिक इतिहासकार जिसने 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता की पहली लड़ाई कहा था-वी.डी. सावरकर
भारतीय स्वाधीनता आंदोलन का सरकारी इतिहासकार था-एस.एन.सेन
भारतीय भाषा में 1857 के विप्लव के कारणों पर लिखने वाला प्रथम भारतीय था- सैयद अहमद खां
“तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम ना प्रथम,न राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था” यह कथन सम्बद्ध है- आर. सी. मजूमदार से
1857 की क्रांति के बारे में सही अवधारणा है- इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की शासन प्रणाली को मृतप्राय बना दिया
महारानी विक्टोरिया ने भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश ताज के नियंत्रण मैं लेने की घोषणा की थी- 1 नवंबर, 1858 को
साम्राज्ञी विक्टोरिया ने 1858 को घोसड़ा में भारतीयों को बहुत सी चीजें दिए जाने का आश्वासन दिया था| वह आश्वासन जिसे ब्रिटिश शासन ने पूरा किया था- रियासतों को हड़पने की नीति समाप्त कर दी जाएगी
महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा(1858 ) का उद्देश्य था- भारतीय राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने के किसी भी विचार का परित्याग करना तथा भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश क्राउन के अंतर्गत रखना
पब्लिक सर्विस आयोग, पील आयोग, हंटर आयोग तथा साइमन कमीशन मैं 1857 के विद्रोह के दमन के बाद भारतीय फौज के नव संगठन से संबंधित है – पील आयोग
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने सिपाहियों का इन प्रांतों से चयन किया- गोरखा, सिख एव पंजाबी उत्तर प्रांत से अन्य जन आंदोलन
1857 के विद्रोह के ठीक बाद बंगाल में सन्यासी विद्रोह, संथाल विद्रोह, नील उपद्रव तथा पावना उपद्रव में से विप्लव हुआ- नील विद्रोह का
नील कृषकों की दुर्दशा पर लिखी गई पुस्तक” नील दर्पण” के लेखक थे- दीनबंधु मित्र
‘वंदे मातरम’ गीत लिखा है- बंकिमचंद्र चटर्जी ने
आनंदमठ उपन्यास की कथावस्तु आधारित है- सन्यासी विद्रोह पर
वह विद्रोह जिसका उल्लेख बंकिमचंद्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आनंद मठ में करके प्रसिद्ध किया-सन्यासी विद्रोह
मुंगेर के बरहीयाताल विरोध का उद्देश्य था- बकास्त भूमि की वापसी की मांग
19वी शताब्दी के दौरान होने वाले” वहाबी आंदोलन” का मुख्य केंद्र था- पटना
कूका आंदोलन के संगठित किया- गुरु राम सिंह ने
पागलपंथी विद्रोह वस्तुतः एक विद्रोह था- गारो का
‘पागल पंथ’ की स्थापना की थी- करमशाह ने
फराजी विद्रोह का नेता था- दादू मियां
फराजी थे- हाजी शरिअतुल्लाह के अनुयायी
वेलु थम्पी ने अंग्रेजो के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व किया था – केरल में
महाराष्ट्र में रामोशी कृषक जत्था स्थापित किया था- वासुदेव बलवंत फड़के ने
रामोसी विद्रोह सही रूप में जिस भौगोलिक इलाके में हुआ था, वह था- पश्चिमी घाट
गड़करी विद्रोह का केंद्र था- कोल्हापुर
मानव बलि प्रथा का निषेध करने के कारण अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने वाली जनजाति का नाम- खोंद
कोल विद्रोह(1831- 32) का नेतृत्व किया- बुध्दू भगत ने
बघेरा विद्रोह हुआ- बड़ौदा में
छोटा नागपुर जनजाति विद्रोह हुआ था- 1820ई. मैं
संथाल विद्रोह का नेतृत्व किया- सिध्दू कान्हू एव भैरव चांद
1855ई . मैं संथालों ने किस अंग्रेज कमांडर को हराया- मेजर बारो
भील विद्रोह, कोल विद्रोह, रम्पा विद्रोह तथा संथाल विद्रोह में से वह घटना जो महाराष्ट्र में घटित हुई- भील विद्रोह
मेवाड़, बागड़, और पास के क्षेत्रों के भीलो में सामाजिक सुधार के लिए’ लसोणिया आंदोलन’ का सूत्रपात किया- गोविंद गिरी ने
उलगुलन विद्रोह जुड़ा था- बिरसा मुंडा से
जिस आदिवासी नेता को जगत पिता(धरती आबा) कहा जाता था, वह था- बिरसा मुंडा
बिरसा मुंडा का कार्यक्षेत्र था- रांची
जनजाति लोगों के संबंध में’ आदिवासी’ शब्द का प्रयोग किया था- ठक्कर बापा ने
भारत में19वी शताब्दी के जनजातीय विद्रोह के लिए जिसने साझा कारण मुहैया किया- जनजातीय समुदायों की प्राचीन भूमि संबंधी व्यवस्थापक संपूर्ण
हौज विद्रोह हुआ- (1820- 21 ई.) के दौरान
खैरवार आदिवासी आंदोलन हुआ- 1874ई. मैं
संभलपुर के अनेक ब्रिटिश विरोधी विद्रोहो का नेता था- सुरेंद्र साईं
नील विद्रोह, संथाल विद्रोह, दक्कन के दंगे तथा सिपाही विद्रोह का सही कालानुक्रम है- संथाल विद्रोह, सिपाही विद्रोह, नील विद्रोह, दक्कन के दंगे
1921 का मोपला विद्रोह हुआ था- केरल में
अंग्रेजों के विरुद्ध भीलो द्वारा क्रांति प्रारंभ की गई थी- मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में
ताना भगत आंदोलन उत्तराउराव ने प्रारंभ किया था- 1914 में
महात्मा गांधी एवं उनके विचारों से प्रभावित होने वाले प्रथम आदिवासी नेता थे- जोड़ानांग
वाराणसी में प्रथम संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की थी-जोनाथन डंकन ने
सर्वप्रथम’भगवतगीता’ अंग्रेजी में अनुवाद किया था-चार्ल्स विल्किंस ने
कालिदास की प्रसिद्द रचना सकुन्तला का पहली बार अंग्रेजी में अनुवाद किया था-सर विलियम जोंस ने
ब्रिटिश सरकार के जिस अधिनियम ने सबसे पहली बार भारत में शिक्षा के लिए 1 लाख रूपये दिए थे-चार्टर अधिनियम,1813

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